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Saturday, July 31, 2010

हरी ॐ


मन के पौधे को संसार से उखाड़कर परमात्मा के दरबार में लगा दो, भक्ति से सीचना इस पौधे को। ज्ञान का जल, तपस्या की खाद डालना, यह मन भगवन का दर्शन कराएगा।

Thursday, July 29, 2010

जय गुरुदेव


सत्संग की ज्ञान गंगा से मन को पवित्र करके इस उचल कूद मचाते हुए मन को परमात्मा रुपी नाम की लोरी सुनते जाओ, तब यह मन परमात्मा में निमग्न होगा।

Tuesday, July 27, 2010

जय गुरुदेव

परमात्मा से मिले बिना व्यक्ति को चैन और आनंद नहीं मिल सकता। इसलिए जीवन में भक्ति का नियम बनाओ नित्य निरंतर भक्ति में बैठो। भक्ति तब भीतर उतरेगी जब मन कपट रहित होगा।

Sunday, July 25, 2010


"प्रभु के भरोसे हांको गाडी, जब लुट जाएगी श्वासों की पूँजी, बहुत पछताओगे अनाड़ी"

Thursday, July 15, 2010

योगदर्शन

चित्त एक सरोवर की तरह है, जिसमे तरंगे उठती रहती हैं। जिससे मनुष्य मूल तत्त्व का अवलोकन नहीं कर पाता। जब बताये गए साधनों के द्वारा चित्त रुपी सरोवर की तरंगे शांत हो जाती हैं तो उसमे प्रवाहित होने वाला जल निर्मल हो जाता है और आत्मा का परमात्मा से योग होता है।

Tuesday, July 13, 2010

सुख और आनंद


सुविधाओ में तो सब मुस्कुराते हैं, लेकिन दुविधाओ में जो मुस्कुराता है वहि महान साधक है। साधन- सुविधाओ के होने से सुख और शांति प्राप्त नहीं होती, बल्कि जीवन को सुव्यवस्थित बनाने से सुख और आनंद की प्राप्ति होती है।